इश्क़

0
199

जो काएनआत के हर ज़र्रे में है, वो है इश्क़!
जहाँ हर दास्ताँ ख़त्म होती है, वो है इश्क़!
और जहाँ से हर दास्ताँ शुरू भी होती है, वो है इश्क़!

जो माँ की आँख से आँसू बन बहे, वो दरिया है इश्क़!
जो भाई की कलाई पर हर साल बँधता है, वो धागा है इश्क़!

जो तुम्हें कभी डगमगाने ना दे, वो दोस्त है इश्क़!
जो हर मुश्किल में चुपके से आके हाथ पकड़ ले, वो भाई है इश्क़!

सितारों की चादर तले जो चाँद को निहारे, वो चकोर है इश्क़!
छाननी की ओट से जिसे देख रूह मुस्काये, वो चेहरा है इश्क़!

यह इश्क़ ही तो है, जो हर साँस में बस कर, रूह को आबाद करता है!
यह इश्क़ ही तो है, जो हर सुबहा एक मुस्कान बन कर चेहरे पर खिलता है!

यह इश्क़ ही तो है, जो हर रात एक ख्वाब लेकर, सिरहाने पर मिलता है!
जो काएनआत के हर ज़र्रे में है, वो ही तो है इश्क़!

जहाँ पे हर दास्तान ख़त्म होती है, वो है इश्क़!
और जहाँ से हर दास्तान शुरू भी होती है, वोही तो है इश्क़!



SHARE
Previous articleThe Angel in White !
Next articleకలర్స్
I'm a qualified zoologist, hospital administrator by education. But a voice over artist and RJ by profession. Writing is relatively new to my personality and it's looking to overtake all other passions! I feel privileged to have become a part of this prestigious platform along with so many other lovely people; and I'm looking forward to contributing to a better world through my writing. Follow my ideas and latest writings at my iDiya profile.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here